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Posts Tagged ‘देशप्रेम’


शहीदों की अमर कहानी को
तिल-तिल कर जीते देखा है!
हमने अपने उन अपनों को
हर आँसू पीते देखा है!

सो देश पे जो कोई हाथ बढ़े
हमको तो खंजर लगता है!
इस दिल के रिसते ज़ख़्मों में
फिर नश्तर-सा कोई चुभता है!

भूलें कैसे उन वीरों को
इक पल चैन से जो सोये नहीं!
भारतमाँ के जीवन के लिए
जो खुद कभी जिए ही नहीं!

हम सुंदर सजे हुए कमरों में
गीतों से दिल बहलाते हैं!
कभी ज्ञान की बातें करते हैं
खुशियों के दीप जलाते हैं!

क्योंकि दूर वहाँ इक प्रहरी खड़ा
बर्फ़ के बिस्तर पर सोता है!
देश के ही लिए जो जीता है
देश के ही लिए वो मरता है!

हमको अपनी हर इक मुस्कान
उनसे माँगी सी लगती है!
सूरज की सुंदर लाली भी
उनकी ही धरोहर लगती है!

‘मणि’

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अच्छा हमको भी लगता है
सुख-सद्भावों की बात करें!
पर शान्ति अगर कोई न चाहे
कैसे उसका दम भरते रहें!
अच्छा हमको भी लगता है
मीठे झरने से बहते रहें!
पीठ में खंजर कोई घोंपा करे
फिर कैसे प्रीत की राह चलें!
अच्छा हमको भी लगता है
रंगीं फूलों से बिखरा करें!
यदि लाल रंग ही शेष बचे
कैसे शान्ति की बात करें!
अच्छा हमको भी लगता है
सब आबाद रहें खुशहाल रहें!
वो गुलशन जो बर्बाद करें
हम कैसे चमन गुलज़ार करें!
अच्छा हमको भी लगता है
चंदन से तिलक करते ही रहें!
वो शीश हमारा जो चाहें
कैसे हम ये स्वीकार करें!
                              ‘मणि’

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” फूलों से हमें है प्यार बहुत
  पर काँटे भी सह सकते हैं!
  वतन को ज़रूरत पड़ जाए
  तो आग पे भी चल सकते हैं!
  कश्ती जो घिरे तूफानों में
  हम लहरों में पतवार बनें!
  मौजों के झंझावातों में
  हम जीत का जयजयकार बनें
  नज़रें न उठा के देखे कोई
  भारत के पहरेदार हैं हम!
  वफ़ा पर जान लुटा देंगे
  गद्दार के लिए ललकार हैं हम!
                                         ‘ मणि ‘

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