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Archive for the ‘My poems and write-ups ( Dil Se…)’ Category


 

जीवन में मानें नहीं हार
बादल ढक लें सूरज को दिन चार
उसकी चमक न धुंधलाए
चाहे कोशिशें कर लें हज़ार
जीवन में मानें नहीं हार

मिट्टी में भी मिल जाएँ तो क्या
मिट्टी अपनी जननी है
बीज की तरह फिर उगें, बढ़ें
फलों फूलों से लदे वृक्ष हो जाएँ
जीवन में मानें नहीं हार

विपत्तियों में जलें तो क्या
जलें, गिरें फिर उठें
उस अमरपक्षी की तरह
पुनर्जीवित जो होता है अपनी ही राख से!

                                                         मणि

Never give up in life
Clouds may shroud the Sun for a few days
But cannot fade the Sunlight
No matter how hard the clouds try
Never give up in life

Even if you are totally ruined
Believe in yourself
Grow again like a seed
Be a tree laden with fruits and flowers
Never give up in life

What if you burn in calamities
Burn, fall, then rise
like the Phoenix from his ashes!
Mani

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माँगू क्या तुमसे हे कृपानिधान !
बिन माँगे दिये इतने वरदान
इक बूँद में दिखलाया सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड
असीम आनंद पाया कर ओउम् का ध्यान
सुन कर पक्षी भी प्रसन्नता से करते गान
सूर्य झट न्यौछावर करता अपनी मुस्कान
मुझसे अधिक मेरे सुख-दुख का तुमको ध्यान
हे ईश ! इतना ही बस देना दान
हृदय हो सद्गुणों का उद्गम स्थान
हर्ष-विषाद में चित्त रहे एक समान
मंगल हो सदा, अमंगल का हो प्रस्थान
सृष्टि का निरन्तर होता रहे कल्याण!
मणि

What do I wish for O merciful God!
You showered so many boons without asking
Revealed the whole universe in a drop
Infinite bliss found in Aum meditation
Even the birds sing with joy to the tune of Aum
And the sun hurries out to smile
You care more for my happiness and sorrow than me
Dear God! my only prayer to you is
May virtues be born and reside in my heart
Let me be balanced in joys and sorrows
Let the goodness stay and evil go
May the world and universe be blessed always!
Mani

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कहीं खिलखिलाती हँसी की फुहार
कहीं बह रही अविरल अश्रुधार
लगता तो है, बारिशों का मौसम आ गया

कहीं फूलों को निखारती बूँदें
कहीं जलमग्न वो प्यारे घरौंदे
लगता तो है, बारिशों का मौसम आ गया

कहीं मयूरी को रिझाने थिरके मयूर
कहीं विरह-वेदना बहती सुदूर
लगता तो है, बारिशों का मौसम आ गया

कहीं बिखरी इन्द्रधनुष की छटा
कहीं काले घने बादलों की घटा
लगता तो है, बारिशों का मौसम आ गया

सुख-दुख, दुख-सुख की बहती रहेगी बयार
गाती ये सावन की फुहार
मणि

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मैंने देखा है ज़िंदगी को
पल में बदलते हुए
रात से पहले सूरज को
रंगों में ढलते हुए

साँसों की सरगम को
बस यूँ ही जमते हुए
जीवन के पहिये को
अचानक थमते हुए

मैंने देखा है ज़िंदगी को
पल में बदलते हुए
रात से पहले सूरज को
रंगों में ढलते हुए

सपनों के चमकीले दाने
चक्की में पिसते हुए
छोटे छोटे से हाथों को
लकीरें घिसते हुए

मैंने देखा है ज़िंदगी को
पल में बदलते हुए
रात से पहले सूरज को
रंगों में ढलते हुए
मणि

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IMG_20190724_074304_416When life goes topsy and turvy
When bends on the road seem too curvy
One day at a time is the way to go my friend
One day at a time!

When the rugged road makes you stumble
And all your plans seem to crumble
One day at a time is the way to go my friend
One day at a time!

When the cape of misery cloaks and shrouds
Peep at the rainbow, forget the clouds
One day at a time is the way to go my friend
One day at a time!

When face to face with a malady
Sport a smile, turn it into a melody
One day at a time is the way to go my friend
One day at a time!

Just stick your neck out, don’t whine!
Trouble will be on its knees, let your spirit shine!
One day at a time is the way to go my friend
One day at a time!

Mani

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शहीदों की अमर कहानी को
तिल-तिल कर जीते देखा है!
हमने अपने उन अपनों को
हर आँसू पीते देखा है!

सो देश पे जो कोई हाथ बढ़े
हमको तो खंजर लगता है!
इस दिल के रिसते ज़ख़्मों में
फिर नश्तर-सा कोई चुभता है!

भूलें कैसे उन वीरों को
इक पल चैन से जो सोये नहीं!
भारतमाँ के जीवन के लिए
जो खुद कभी जिए ही नहीं!

हम सुंदर सजे हुए कमरों में
गीतों से दिल बहलाते हैं!
कभी ज्ञान की बातें करते हैं
खुशियों के दीप जलाते हैं!

क्योंकि दूर वहाँ इक प्रहरी खड़ा
बर्फ़ के बिस्तर पर सोता है!
देश के ही लिए जो जीता है
देश के ही लिए वो मरता है!

हमको अपनी हर इक मुस्कान
उनसे माँगी सी लगती है!
सूरज की सुंदर लाली भी
उनकी ही धरोहर लगती है!

‘मणि’

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अच्छा हमको भी लगता है
सुख-सद्भावों की बात करें!
पर शान्ति अगर कोई न चाहे
कैसे उसका दम भरते रहें!
अच्छा हमको भी लगता है
मीठे झरने से बहते रहें!
पीठ में खंजर कोई घोंपा करे
फिर कैसे प्रीत की राह चलें!
अच्छा हमको भी लगता है
रंगीं फूलों से बिखरा करें!
यदि लाल रंग ही शेष बचे
कैसे शान्ति की बात करें!
अच्छा हमको भी लगता है
सब आबाद रहें खुशहाल रहें!
वो गुलशन जो बर्बाद करें
हम कैसे चमन गुलज़ार करें!
अच्छा हमको भी लगता है
चंदन से तिलक करते ही रहें!
वो शीश हमारा जो चाहें
कैसे हम ये स्वीकार करें!
                              ‘मणि’

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” फूलों से हमें है प्यार बहुत
  पर काँटे भी सह सकते हैं!
  वतन को ज़रूरत पड़ जाए
  तो आग पे भी चल सकते हैं!
  कश्ती जो घिरे तूफानों में
  हम लहरों में पतवार बनें!
  मौजों के झंझावातों में
  हम जीत का जयजयकार बनें
  नज़रें न उठा के देखे कोई
  भारत के पहरेदार हैं हम!
  वफ़ा पर जान लुटा देंगे
  गद्दार के लिए ललकार हैं हम!
                                         ‘ मणि ‘

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Dear All,

Posted a new song today which I have written… Please take time to listen whenever you can and give your blessings and true opinion _()_

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